Symptoms of Blood cancer in Hindi | ब्लड कैंसर के लक्षण

Symptoms of blood cancer :- ब्लड कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसे समय रहते अगर इस बीमारी का पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है लेकिन जड़ से हमेशा के लिए खत्म नहीं किया जा सकता है | शुरुआती लक्षण में इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है इसीलिए इसे सबसे ज्यादा खतरनाक बीमारी माना जाता है |

शरीर में जब इस बीमारी की शुरुआत होती है तो इस बीमारी के छोटे -मोटे लक्षण को लोग इग्नोर कर देते है | डॉक्टर का कहना है की ब्लड कैंसर का ईलाज हालाँकि संभव तो नहीं है लेकिन समय रहते इसे शुरुआत में अगर रोक दिया जाए तो ये बीमारी ठीक हो सकती है |

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ब्लड कैंसर क्या है ? Blood cancer Kya hai in Hindi

ब्लड कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसमे कैंसर के सेल्स शरीर में खून का निर्माण करने नहीं देता है और फिर जो ब्लड कैंसर से पीड़ित है उनमे खून की कमी होने लगती है | ब्लड कैंसर खून की कमी के साथ साथ बोनमैरो पर भी घातक प्रहार करता है | और इसी बजह से खून नहीं बनने के कारण इन्सान की मृत्यु हो जाती है |

ब्लड कैंसर को को लोग जनलेवा बीमारी इसीलिए कहा जाता है क्यूंकि आरम्भ में इसके लक्षण को पहचाना नहीं जा सकता है | और जब तक इसके लक्षण को समझ पता है तब तक यह एक घातक बीमारी बीमारी बनकर रोकने वालो के लिए चुनौती बन जाती है |

ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण समझ में नहीं आने के कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते है और फिर इसे टाल देते है और यही बजह है की लोग इसके चपेट में जल्दी आ जाते है और फिर एक लाईलाज बीमारी बनकर उभरता है |

क्यों होता है ब्लड कैंसर ? Why is blood cancer in hindi

इन्सान में ब्लड कैंसर होने की कोई उम्र या सीमा निर्धारित नहीं है यह किसी भी उम्र के या किसी को भी हो सकती है | ब्लड कैंसर के द्वारा कैंसर की कोशिकाएं यानि सेल्स शरीर में खून को बनने से रोकता है जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है | और साथ ही साथ ब्लड कैंसर होने पर इन्सान की बोन मैरो पर भी नुकसान पहुचता है |

ब्लड कैंसर के कुछ लक्षण – Symptoms of blood cancer in Hindi

पुरे दुनियाभर में सबसे ज्यादा मृत्यु का कारण ब्लड के कैंसर के कारण होता है | ब्लड कैंसर उस जगह से होना शुरू होता है जहाँ पर से रक्त का निर्माण होता है | चुकिः ब्लड कैंसर को शुरूआती दौर में ही पहचाना जा सकता है | कुछ ऐसे लक्षण सामने आते है जिससे ब्लड कैंसर होने के संकेत मिलते है | आइये जानते है ब्लड कैंसर के लक्षण के बारे में –

  • रात भर पसीना आना
  • साँस लेने में तकलीफ होना
  • त्वचा के अन्दर गांठ या सुजन होना
  • त्वचा में खुजलिपन होना
  • पेट, हड्डी या जोड़ो में दर्द होना
  • मसुडो से हमेशा खून बहते रहना
  • भूख में कमी आना
  • आराम करने के बाद भी थकान महसूस होना
  • शरीर का पिला पड़ जाना , आदि

स्वास्थ्य सलाहकार का कहना है की अगर इसमें कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अपने डॉक्टर से जरुर संपर्क करे |

ब्लड कैंसर होने के कारण – Blood cancer hone ke Karan in Hindi

शरीर में ब्लड कैंसर होने के बहुत सारे कारण हो सकते है |

  • प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर हो जाना कैंसर के होने से हो सकता है |
  • मनुष्य के लिए ध्रूमपान करना ब्लड कैंसर के एक कारण हो सकता है |
  • ज्यादा फैक्ट्री या केमिकल के संपर्क में आने से ब्लड कैंसर होने का कारण बन जाता है |
  • अगर घर के किसी एक सदस्य को कैंसर है तो कोई और सदस्य को ब्लड कैंसर होने का कारण बन सकता है |
  • जो व्यक्ति HIV से पीड़ित है तो उसमे ब्लड कैंसर होने का खतरा बन जाता है |
  • रेडिएसन के संपर्क में ज्यादा आने से ब्लड कैंसर होने का कारण बन जाता है |

ब्लड कैंसर के प्रकार – type of blood cancer in hindi

  • ल्यूकोमा :- ल्यूकोमा ब्लड कैंसर प्राथमिक ब्लड कैंसर है | इसमें लाल रक्त सेल के तुलना में सफ़ेद रक्त सेट काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है | कुछ लोगो के अध्ययन में पता चला है की यह ल्यूकोमा ब्लड कैंसर की शुरुआती स्टेज धीरे धीरे होती है और आगे चलकर खतरनाक हो जाती है | इसके कुछ प्रकार होते है जिससे लोग अनभिग्य है जिनमे से 4 मुख्य है |
  1. एक्यूट ल्यूकोमा :- इसमें रक्त और मैरो के सेल बहुत तेजी से बढ़कर इकठ्ठा होकर बोन मैरो में जमा होने लगती है |
  2. क्रोनिक ल्यूकोमा :- जब शरीर में जरुरी सेल्स के अलावा कुछ अविकसित सेल बनने लगता है तो इसे क्रोनिक ल्यूकोमा कहते है | यह समय के साथ बढ़ते चला जाता है और अंत में गंभीर समस्या उत्पन्न कर देता है |
  3. लिम्फोसयितिक ल्यूकोमा :- इसमें बोन मैरो के सेल्स सफ़ेद ब्लड सेल्स में बदलने लगता है |
  4. मायलोजनस ल्यूकोमा :- इसमें मैरो में जब लाल रक्त सेल्स और सफ़ेद रक्त सेल्स के अलावा प्लेलेट्स का निर्माण करता है |
  • ल्युमफोमा :- लल्युमफोमा में शरीर की लिम्फोसाईट की विकास की प्रक्रिया बहुत तेज़ी हो जाती है | इसका इलाज रेडिएसन थेरेपी और दवाइयों केर द्वारा किया जाता है |
  • माइलोमा :- माइलोमा में व्यक्ति के प्लाज्मा सेल्स बहुत बुरी तरह प्रभावित होते है जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाता है |

ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण- Starting Symptoms of blood cancer in hindi

ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण में अकसर लोग में थकान और कमजोरी जैसी लक्षण दिखाई देने लगता है | इसमें व्यक्ति की लाल रक्त की कमी होना शुरू हो जाता है जिसके कारण पेट में सुजन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है | जिसके साथ साथ मल त्याग करने में कठिनाई उत्पन्न हो जाति है और भूख लगने में भी कमी दिखाई देने लग जाता है |

अगर किसी रोगी को ब्लड का कैंसर हो गया है तो उसे मुंह, गला , त्वचा आदि में कई तरह के समस्या उत्पन्न हो जाती है | अक्सर बुखार आना भी इसका लक्षण हो सकता है | अगर बिना कारण से शरीर का बजन कम होना या ज्यादा होना शुरू हो जाता है तब यह लक्षण ब्लड कैंसर का होता है

ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण में माइग्रेन पेन भी देखने को मिलता है | और इसके साथ ही साथ उल्टियाँ , चक्कर आना , त्वचा में खुजली होना , त्वचा पर धब्बे जैसी दिखाई देना , मसुडो में सुजन और खून आना , यह सब लक्षण ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते है |

ब्लड कैंसर का उचित इलाज – Blood cancer ka ilaj in Hindi

हर कैंसर का एक स्टेज होता है जिससे पता चलता है की कैंसर की स्थिति क्या है और कहाँ तक पहुची है | ब्लड कैंसर के ;लक्षण और दुसरे कैंसर के लक्षण में बहुत अंतर होता है इसीलिए डॉक्टर को समझ पाना चुनौती होता है की ब्लड कैंसर से पीड़ित रोगी को ब्लड कैंसर कैसे हुआ है |

लेकिन आज की तकनिकी और आधुनिक मशीन के द्वारा यह जान पाना बहुत आसान हो गया है | और अब मेडिकल science में ऐसा ऐसा मेडिसिन आ गयी है जिससे इसकी शुरुआत में ही पहचाना जा सकता है | और यह पता लगाया जा सकता है की कैंसर कौन सा कोशिका से उत्पन्न हुआ है और कौन से माध्यम से इसे कोशिका में ही खत्म किया जा सके | इस आधुनिक चिकित्सा को मेडिकल भाषा में कीमोथेरेपी कहा जाता है |

ध्यान देने योग्य बातें

अक्सर ध्यान देने बात यह की जिस मशीन के द्वारा कैंसर का इलाज किया जाना है वो सही ढंग से कार्य कर रहा है या नहीं | भारत में ऐसा देखा गया की कई hospital में मशीन ठीक से कार्य न करने के बाबजूद भी उसे नहीं बदलते है | जिसका सबसे मुख्य कारण होता है मशीन का कीमत बहुत ज्यादा होना |

सरकारी अस्पताल में हालाँकि कुछ हद तक ठीक है लेकिन प्राइवेट अस्पताल में अक्सर इसे लेकर लापरवाही कर देते है | जिससे रिपोर्ट गलत आता है और समय पर इलाज नहीं होने से उसका रोग बढ़ते चला जाता है | इसमें सबसे ज्यादा रोगियों को झेलना पड़ता है की वह समय पर इलाज शुरू करने के बाबजूद उनके साथ हमेशा गलत हो जाता है |

इसीलिए याद रखे जब भी आप कोई टेस्ट करबाए तो प्रमाणित लैब सेंटर से ही करबाए

अस्वीकरण :- इस site पर उपलब्ध सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है | यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए | उपचार के लिए योग्य चिकित्सक का सलाह ले |

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